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सेवाएँ

हम आपके लिए क्या बना सकते हैं

ऐप, वेबसाइट और उनके पीछे का सिस्टम — पूरा ब्यौरा पहले लिखित में, काम आपकी नज़र के सामने, और आख़िर में सब कुछ आपके नाम पर।

मोबाइल ऐप

एक ही कोड से Android और iOS, दोनों — React Native और Expo पर। बनाने से लेकर स्टोर पर लाइव होने तक का पूरा काम।

  • दोनों के लिए एक ही कोड — खर्च एक बार, ऐप दो
  • जहाँ ज़रूरी हो वहाँ बिना इंटरनेट भी चले — नेटवर्क कमज़ोर हो तब भी काम न रुके
  • पुश नोटिफ़िकेशन, कैमरा, नक्शा, पेमेंट, फ़ाइल अपलोड
  • Play Store और App Store पर अपलोड, स्क्रीनशॉट, लिस्टिंग और ज़रूरी पॉलिसी पेज
  • रिलीज़ का सही तरीक़ा: पहले अपनी टीम, फिर चुने हुए टेस्टर, फिर थोड़े-थोड़े करके सबके लिए

वेबसाइट और लैंडिंग पेज

तेज़ और साफ़ साइट — मोबाइल डेटा पर भी एक सेकंड में खुल जाए, और गूगल पर लोगों को मिले भी।

  • स्टैटिक साइट: न WordPress के अपडेट का झंझट, न हैक होने का उतना डर
  • पहले मोबाइल को ध्यान में रखकर डिज़ाइन, डार्क मोड के साथ
  • गूगल पर मिलने की पूरी तैयारी — टाइटल, डिस्क्रिप्शन, साइटमैप और बाक़ी सब
  • कॉन्टैक्ट फ़ॉर्म जो सच में काम करे — संदेश सीधे आपके इनबॉक्स में, स्पैम की छँटाई के साथ
  • डोमेन, SSL और होस्टिंग भी हम ही सेट कर देंगे — अक्सर एक छोटे सर्वर के खर्च में

वेब ऐप्लिकेशन और डैशबोर्ड

दफ़्तर के अंदर का वह सिस्टम, जिस पर रोज़ का काम टिका होता है — लॉगिन, अलग-अलग अधिकार, रिकॉर्ड, रिपोर्ट और डाउनलोड।

  • किसे क्या दिखेगा, यह पहले से तय — दफ़्तर, स्टाफ़ और ग्राहक, सबके लिए अलग
  • डैशबोर्ड पर वही आँकड़े, जो आप रोज़ सुबह देखना चाहते हैं
  • Excel और PDF में डाउनलोड, छपने लायक़ रिपोर्ट, एक साथ ढेर सारा डेटा चढ़ाना
  • कई ब्रांच और कई लोग, शुरू से ही — बाद में जुगाड़ से जोड़ा हुआ नहीं

बैकएंड और API

वह हिस्सा, जो किसी को दिखता नहीं और जिस पर सब कुछ टिका होता है — चलता रहे, तेज़ रहे, और डेटा कभी न खोए।

  • Node और TypeScript में API, हर हिस्से का पूरा दस्तावेज़ लिखा हुआ
  • PostgreSQL या SQLite — और काम बढ़ने पर आगे बढ़ने का साफ़ रास्ता
  • लॉगिन, अधिकार और अनुमतियाँ, ठीक तरीक़े से
  • पेमेंट, SMS और ईमेल का जुड़ाव
  • अपने आप बैकअप — और डेटा वापस लाने का तरीक़ा भी, जिसे हम पहले आज़माकर देख चुके होते हैं

सर्वर पर चढ़ाना और सँभालना

लाइव करना, और लाइव बनाए रखना — सर्वर, SSL, निगरानी और बैकअप जैसे वे काम, जिनकी चर्चा कोई नहीं करता।

  • सर्वर की पूरी सेटिंग: Nginx, HTTPS, फ़ायरवॉल और सुरक्षित डिप्लॉय यूज़र
  • गड़बड़ी की ख़बर आपसे पहले हमें मिले — इसके लिए अलर्ट और निगरानी
  • तय समय पर बैकअप, सर्वर से अलग जगह सुरक्षित
  • सुरक्षा और सिस्टम के अपडेट समय पर
  • मदद जैसी ज़रूरत हो — काम पड़ने पर, या हर महीने तय समय पर

क्या बनाना है, यह तय करने में मदद

अभी साफ़ नहीं कि बनवाना क्या है? बात करके हम उसे वहाँ तक ले आएँगे, जहाँ पहला वर्ज़न पैसा लगाने लायक़ बन जाए।

  • मन की बात को काग़ज़ पर, बनाने लायक़ रूप में उतारना
  • पहले वर्ज़न में क्या ज़रूरी है, और क्या सच में बाद के लिए रुक सकता है
  • कोड लिखने से पहले स्क्रीन-दर-स्क्रीन ख़ाका
  • खर्च, समय और जोखिम पर सीधी बात
साथ काम करने के तरीक़े

शुरुआत आमतौर पर इन तीन में से किसी एक तरह से होती है

हर प्रोजेक्ट की क़ीमत उसके असली काम से तय होती है — कोई बना-बनाया पैकेज नहीं, जिसमें आपकी ज़रूरत को फ़िट करना पड़े।

तय काम, तय क़ीमत

एक ऐप, एक वेबसाइट, एक पोर्टल — काम, स्क्रीन और समय पहले से तय, और लिखित। जब आपको मोटे तौर पर पता हो कि क्या चाहिए, तब यही सबसे ठीक रहता है।

हर महीने तय समय

हर महीने हमारा कुछ समय आपके नाम: नए फ़ीचर, सुधार, अपडेट, और कुछ गड़बड़ होने पर बात करने के लिए कोई मौजूद। लॉन्च के बाद, या लगातार बढ़ते काम के लिए।

पहले से बने ऐप को सँभालना

किसी और ने बनाया और बीच में छोड़ दिया। हम कोड पढ़कर साफ़ बताते हैं कि हालत क्या है और उसे पटरी पर लाने में कितना लगेगा — फिर उसे चलाते रहते हैं।

तरीक़ा

पहली बात से लाइव होने तक

  1. पहले बात

    एक फ़ोन कॉल या एक लंबा ईमेल। दिक्कत क्या है, इसे चलाएगा कौन, और काम बनने पर क्या बदलेगा? इसका कोई पैसा नहीं, और कोई बंधन नहीं।

  2. सब कुछ लिखित में

    आपको स्क्रीन, फ़ीचर की लिस्ट, समय और क़ीमत लिखकर मिलती है — और यह भी साफ़ लिखा रहता है कि पहले वर्ज़न से हम जान-बूझकर क्या बाहर रख रहे हैं।

  3. काम आपकी नज़र के सामने

    हम छोटे-छोटे हिस्सों में बनाते हैं, और हर हफ़्ते आप असली चीज़ चलती हुई देखते हैं — अपने फ़ोन पर या एक टेस्ट लिंक पर। इस दौर में रास्ता बदलना सस्ता पड़ता है।

  4. लॉन्च

    स्टोर पर अपलोड, डोमेन, SSL, सर्वर, बैकअप और निगरानी। उसके बाद सारे अकाउंट आपके नाम पर आपको सौंप दिए जाते हैं।

  5. आगे भी चलता रहे

    बग, अपडेट, फ़ोन और स्टोर के बदलते नियम, और अगले फ़ीचर। ज़रूरत पड़ने पर, या हर महीने तय समय पर — जैसा आप कहें।

सवाल-जवाब

जो लोग सबसे पहले पूछते हैं

कितना समय लगता है?

एक वेबसाइट में आम तौर पर दो से तीन हफ़्ते। मोबाइल ऐप के पहले वर्ज़न में छह से बारह हफ़्ते — यह देखकर कि उसे करना क्या-क्या है — और आख़िर में स्टोर की जाँच का समय अलग। असली समय हम लिखित ब्यौरे के साथ पहले ही बता देते हैं, काम मिलने के बाद नहीं।

कोड पर हक़ किसका रहेगा?

पूरा आपका। सोर्स कोड, डोमेन, स्टोर की लिस्टिंग, सर्वर और डेटाबेस — सब आपके अपने अकाउंट में। लॉन्च के समय सारे पासवर्ड आपको सौंप दिए जाते हैं। कल आप किसी और से काम कराना चाहें, तो हमारी तरफ़ से कोई अड़चन नहीं।

खर्च कितना आएगा?

यह इस बात पर है कि बनाना क्या है, इसलिए हम हर काम का अलग हिसाब देते हैं। रेट लिस्ट छापने का कोई मतलब नहीं — वह आपके काम पर बैठेगी ही नहीं। पहली बातचीत और लिखित अनुमान, दोनों मुफ़्त। और जो क़ीमत लिखकर दे दी, उस काम के लिए वही रहती है।

ऐप को Play Store और App Store पर कौन चढ़ाएगा?

यह भी हम ही करेंगे — और सलाह यही रहती है कि अकाउंट आपके नाम पर बने और हमें डेवलपर के तौर पर जोड़ दिया जाए। बिल्ड, साइनिंग, लिस्टिंग, स्क्रीनशॉट, स्टोर की माँगी गई प्राइवेसी पॉलिसी और जाँच की पूरी प्रक्रिया हमारे ज़िम्मे — नए अकाउंट पर Google जो टेस्टिंग कराता है, वह भी।

लॉन्च के बाद क्या?

ऐप लॉन्च होकर ख़त्म नहीं होता। फ़ोन अपडेट होते रहते हैं, स्टोर के नियम बदलते हैं, सुरक्षा के पैच आते हैं, और यूज़र ऐसी चीज़ें पकड़ते हैं जो पहले किसी को नहीं दिखीं। आगे क्या करना सच में ज़रूरी है, यह हम बता देंगे — और ज़रूरत पड़ने पर या हर महीने तय समय पर मदद देते रहेंगे। लेना ज़रूरी नहीं है।

क्या छिंदवाड़ा से बाहर भी काम करते हैं?

हाँ। रहते हम छिंदवाड़ा में हैं, पर काम कहीं का भी लेते हैं — फ़ोन, ईमेल और एक टेस्ट लिंक, जिसे आप अपने फ़ोन पर खोलकर देख सकें। इसके लिए आमने-सामने बैठना ज़रूरी नहीं, हालाँकि बड़ी बातचीत के लिए मिलने में हमें ख़ुशी होगी।

NDA साइन करेंगे?

ज़रूर। आपका हो तो भेज दीजिए; नहीं तो कहिए, हम एक सीधा-सादा भेज देंगे। वैसे भी आपका आइडिया और आपका डेटा आपका ही रहता है।

हमें बस एक छोटी-सी वेबसाइट चाहिए, क्या यह काम बहुत छोटा है?

बिलकुल नहीं। एक पेज की अच्छी, तेज़ साइट भी पूरा काम है — और छोटे कारोबार के लिए सबसे काम की चीज़ों में से एक। कई बार लंबी बातचीत की शुरुआत भी यहीं से होती है।

बताइए, आप क्या बनवाना चाहते हैं

बस एक पैराग्राफ़ में दिक्कत लिख भेजिए। बनवाने लायक़ है या नहीं, कितना समय लगेगा और कितना खर्च — इन सब पर सीधा जवाब मिलेगा, और पैसे की बात उसके बाद।

ईमेल ज़्यादा ठीक लगे तो यहाँ लिखिए — chhindwaralabs@gmail.com