मोबाइल ऐप
एक ही कोड से Android और iOS, दोनों — React Native और Expo पर। बनाने से लेकर स्टोर पर लाइव होने तक का पूरा काम।
इसमें क्या-क्या शामिल है →Chhindwara Labs एक छोटी सॉफ़्टवेयर कंपनी है। अपने ऐप हम खुद बनाते और चलाते हैं — और उन कारोबारों के लिए ऐप, वेबसाइट और सिस्टम बनाते हैं जो चाहते हैं कि काम ढंग से हो और आगे भी चलता रहे।
शुरू करने से पहले सब कुछ लिखित में · कोड और अकाउंट आपके नाम · बात सीधे बनाने वाले से
किन चीज़ों से बनाते हैं
पहली बातचीत से लेकर Play Store पर ऐप लाइव होने तक — और उस सर्वर तक, जो छह महीने बाद भी बिना रुके चल रहा हो। पूरा काम लीजिए, या उसका कोई एक हिस्सा।
एक ही कोड से Android और iOS, दोनों — React Native और Expo पर। बनाने से लेकर स्टोर पर लाइव होने तक का पूरा काम।
इसमें क्या-क्या शामिल है →तेज़ और साफ़ साइट — मोबाइल डेटा पर भी एक सेकंड में खुल जाए, और गूगल पर लोगों को मिले भी।
इसमें क्या-क्या शामिल है →दफ़्तर के अंदर का वह सिस्टम, जिस पर रोज़ का काम टिका होता है — लॉगिन, अलग-अलग अधिकार, रिकॉर्ड, रिपोर्ट और डाउनलोड।
इसमें क्या-क्या शामिल है →वह हिस्सा, जो किसी को दिखता नहीं और जिस पर सब कुछ टिका होता है — चलता रहे, तेज़ रहे, और डेटा कभी न खोए।
इसमें क्या-क्या शामिल है →लाइव करना, और लाइव बनाए रखना — सर्वर, SSL, निगरानी और बैकअप जैसे वे काम, जिनकी चर्चा कोई नहीं करता।
इसमें क्या-क्या शामिल है →अभी साफ़ नहीं कि बनवाना क्या है? बात करके हम उसे वहाँ तक ले आएँगे, जहाँ पहला वर्ज़न पैसा लगाने लायक़ बन जाए।
इसमें क्या-क्या शामिल है →स्टोर की जाँच, क्रैश रिपोर्ट, डेटा का माइग्रेशन, बैकअप, और ऐसे यूज़र जिन्हें ज़रा-सी गड़बड़ भी तुरंत दिख जाती है — यह सब हम अपने ऐप पर पहले झेल चुके हैं।
बिना इंटरनेट चलने वाला भक्ति ऐप, पूरा हिंदी में
आरती, चालीसा, मंत्र और स्तोत्र, आपके अपने ज़िले के हिसाब से बनता रोज़ का पंचांग, त्योहार और व्रत कथाएँ, भजन, तीर्थ दर्शन, कुंडली और कुंडली मिलान, रोज़ का राशिफल और जप काउंटर — सब बिना इंटरनेट के। न कोई अकाउंट बनाना पड़ता है, न कोई आप पर नज़र रखता है।
DharmaMitra के बारे में और →दफ़्तर, टीचर, बच्चे और पैरेंट्स के लिए स्कूल मैनेजमेंट सॉफ़्टवेयर
एडमिशन, हाज़िरी, फ़ीस, परीक्षा और रिज़ल्ट, होमवर्क, टाइम-टेबल, लाइब्रेरी और ट्रांसपोर्ट — दफ़्तर के लिए वेब पर, और टीचर व पैरेंट्स के लिए मोबाइल ऐप। किसे क्या दिखेगा, यह पहले से तय।
School Connect के बारे में और →हर प्रोजेक्ट में यही पाँच क़दम — चाहे एक पेज की वेबसाइट हो या हज़ार लोगों का सिस्टम।
एक फ़ोन कॉल या एक लंबा ईमेल। दिक्कत क्या है, इसे चलाएगा कौन, और काम बनने पर क्या बदलेगा? इसका कोई पैसा नहीं, और कोई बंधन नहीं।
आपको स्क्रीन, फ़ीचर की लिस्ट, समय और क़ीमत लिखकर मिलती है — और यह भी साफ़ लिखा रहता है कि पहले वर्ज़न से हम जान-बूझकर क्या बाहर रख रहे हैं।
हम छोटे-छोटे हिस्सों में बनाते हैं, और हर हफ़्ते आप असली चीज़ चलती हुई देखते हैं — अपने फ़ोन पर या एक टेस्ट लिंक पर। इस दौर में रास्ता बदलना सस्ता पड़ता है।
स्टोर पर अपलोड, डोमेन, SSL, सर्वर, बैकअप और निगरानी। उसके बाद सारे अकाउंट आपके नाम पर आपको सौंप दिए जाते हैं।
बग, अपडेट, फ़ोन और स्टोर के बदलते नियम, और अगले फ़ीचर। ज़रूरत पड़ने पर, या हर महीने तय समय पर — जैसा आप कहें।
हमारे अपने ऐप लोगों के फ़ोन में चल रहे हैं, और उनके पीछे हमारे अपने सर्वर हैं। स्टोर की जाँच, क्रैश रिपोर्ट, रात दो बजे डेटा वापस लाना — जो सबक़ हमने क़ीमत देकर सीखे, वे आपके काम में भी लगते हैं।
काम शुरू होने से पहले आपको पता होता है कि बनेगा क्या और लगेगा कितना। कोई चीज़ तय काम से बाहर हुई, तो हम उसी वक़्त बता देते हैं — आख़िरी बिल में नहीं।
सोर्स कोड, डोमेन, स्टोर लिस्टिंग, सर्वर और डेटाबेस — सब आपके, आपके अपने अकाउंट में। न कोई बंधन, और कल किसी और से काम कराना हो तो कुछ भी अटकाया नहीं जाता।
कमज़ोर नेटवर्क, साधारण Android फ़ोन, और होस्टिंग का खर्च जो कम रहना ही चाहिए। शुरू से यही सामने रखकर बनाते हैं, क्योंकि हमारे अपने यूज़र भी वहीं हैं।
बस इतना बता दीजिए कि दिक्कत क्या है — मोटे तौर पर ही सही। हम साफ़ कह देंगे कि यह काम हमारे करने लायक़ है या नहीं, कितना समय लगेगा और कितना खर्च आएगा।
ईमेल ज़्यादा ठीक लगे तो यहाँ लिखिए — chhindwaralabs@gmail.com